लड़की होने का तनाव और बंदिशें

लड़का-लड़की भूलो, ये तुम्हारी पहचान नहीं है। लड़की बाद में हो, पहले तुम ‘बोध’ हो, ‘समझदार’ हो। कह सकती हो कि, “मैं समझदार पहले हूँ, लड़की बाद में हूँ तो जानती हूँ कि क्या उचित है और क्या अनुचित है। कोई किसी पर हिंसा करे, और जिसपर हिंसा की गई है फिर उसी का दोष निकाला जाए, तो मैं अच्छे से जानती हूँ कि ये बात गलत है और बेकार में मुझे बताइए मत, नहीं तो आप ही मेरी नज़रों से गिर जाएँगे। अगर आप ये व्यर्थ बातें मुझे बताएँगे तो आप ही मेरी नज़रों से…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org