राम को भुला देने से क्या आशय है?

प्रश्नकर्ता: जीवन में राम को भुला देने से क्या आशय है?

आचार्य प्रशांत: राम को भूलने से आशय हैं — बहुत कुछ और याद कर लेना।

राम को भूलने से यह आशय है कि –(कमरे की ओर इशारा करते हुए) ये कक्ष है छोटा सा, आपने इसको चीज़ों से इतना भर दिया कि यह जिस मौलिक चीज़ से भरा हुआ है, उससे आपका ध्यान ही उचट गया। इसमें आप भर दीजिए चीज़े ही चीज़े और इंसान ही इंसान, आपको कहीं आकाश दिखाई देगा? आपको…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org