रात और दिन दिया जले

प्रश्नकर्ता: ज्योति दिये की दूजे घर को सजाए का क्या अर्थ है?

आचार्य प्रशांत: बिल्कुल सही जगह उंगली रखी है यही सवाल पूछने लायक है। बढ़िया!

गहरा ये भेद कोई मुझको बताए

किसने किया है मुझपर अन्याय

जिसका ही दीप वो बुझ नहीं पाए

ज्योति दिये की दूजे घर को सजाए

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org