योग है अपनी बेड़ियों को अपनी ही ज्वाला में गलाना

योग क्या? योग वो, जो हम सबको चाहिए। योग वो, जो हम सबकी मांग है। किसी और नाम से है, किसी और विषय वस्तु के प्रति है, पर हम सबके पास कोई न कोई मांग है ज़रूर। योग का अर्थ होता है, उससे मिल जाना जो तुम्हारी गहरी से गहरी मांग है। योग का अर्थ होता है, उसे प्राप्त कर लेना जिसे तुमने लगातार चाहा है। योग का अर्थ होता है कि अब तरस नहीं रहे। अब मन आधा-अधूरा नहीं है। ये योग है।

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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