मैं दूसरों से इतना प्रभावित क्यों हो जाता हूँ कि उन्हीं की तरह बर्ताव करने लगता हूँ

प्रश्नकर्ता: मैं दूसरों से इतना प्रभावित क्यों हो जाता हूँ? इतना कि मैं दूसरों की तरह सोचने लगता हूँ, उन्हीं की तरह, जैसा वो चाहते हैं, करने लगता हूँ।

आचार्य प्रशांत: बैठो। कुछ विशेष गड़बड़ नहीं है। कोई ख़ास दिक्क़त नहीं है। क्या नाम है तुम्हारा?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org