मैं किसी भी नियम पर चल क्यों नहीं पाता?

जिनको तुम कह रहे हो कि ‘अपने’ नियम बनाता हूँ, वो भी वास्तव में तुम्हारे नियम नहीं हैं, वो बाहर से आये हुए नियम हैं, संस्कारित नियम हैं। तो उनपर तुम चलोगे तो सही, पर तभी तक चलोगे जब तक कोई और आ कर तुम्हें कुछ और नहीं दे देता। तुमने अभी कुछ देखा, कहीं गये और बहुत प्रभावित हो गये और तुमने अपने लिए एक नियम बना लिया, जो देखा सुना उससे। और दो दिन बाद कोई दूसरा प्रभाव तुम पर आ गया। तो क्या होगा पहले प्रभाव का और क्या होगा उन…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org