मैं इतनी चिंता क्यों करता हूँ?

भरवासा की आशनाई दा, डर लगदा बेपरवाही दा।

~ बुल्लेशाह

आचार्य प्रशांत: आशिकी का क्या भरोसा; बेपरवाही से डर लगता है। वो बेपरवाह है, बुल्लेशाह हों, नानक हों, और कोई भी ‘जानने’ वाला हो, सभी ने यही जाना है: बेपरवाही उसका स्वभाव है। बुल्लेशाह कह रहे हैं, ‘भरोसा की आशनाई दा, डर लगदा बेपरवाही दा’।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org