मूर्तियों और मिथकों को मानें कि नहीं?

मूर्तियों और मिथकों को मानें कि नहीं?

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। बचपन से श्रीरामचरितमानस और भगवद्गीता, ये सब सुनते आ रहे हैं तो बचपन से एक सीख मिली है कि आप भगवान की भक्ति कर सकते हैं और ये एकमात्र तरीक़ा होता है जन्म और मरण के बंधन से मुक्त होने का। तो ये सुना और इसको अमल भी किया और बड़ा आनंद आता है रामभक्ति करने में। भजन में आते हैं, भजन सुनते हैं तो बड़ा सुकून मिलता है। कुछ नहीं चाहिए, बस संतोष महसूस होता है। और श्री राम, श्री कृष्ण, हनुमान जी — इन सबकी…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org