मूर्खता है माँसाहार

आप जब हिंसक होते हो तो आपका रिश्ता कुछ मात्र खाए जाने वाले जानवरों से ही हिंसक नहीं हो जाता। आपका रिश्ता सबसे हिंसक हो जाता है, और फ़िर यह भी हो सकता है कि नैतिकता के कारण आप जानवरों को ना मारें, लेकिन फ़िर आप तमाम अन्य तरीकों, परोक्ष तरीकों से, पता नहीं कितनों को मार रहे हैं।

जानवर को मारने का यही तरीका थोड़े ही होता है कि भोजन के लिए उसकी हत्या कर दो। आपकी फैक्ट्री अगर दिन-रात विषैला धुआँ उत्सर्जित कर रही है, और उस धुएँ के कारण तमाम पक्षी…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org