माँ-बाप को कैसे समझाएँ?

प्रश्नकर्ता(प्र): सर, सेशन के बाद ये सभी बातें हम तो समझ रहे हैं कि हमें क्या चाहिए, जागरुकता बढ़ गयी है, हम समझ सकते हैं लेकिन माता -पिता को कैसे समझाएँ? वो हमारा भला ही चाहते हैं।

आचार्य प्रशांत (आचार्य): भला चाहने भर से नहीं होता। भला तो दुनिया में हर माँ-बाप ने चाहा है, पर देखो संतानों को, भला चाह-चाह कर कैसी हो गयी है दुनिया। मैं खुद नासमझ हूँ, मैं भला चाहूँगा भी तो भी मैं खुद बुरा ही कर दूँगा। मुझे नहीं आती है…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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