माँस खाना अपराध है समूची पृथ्वी के विरुद्ध

आज के समय में माँस का भक्षण किसी का निजी मसला नहीं है, यह कोई व्यक्तिगत बात नहीं है, हम कुछ भी खाएँ इससे दूसरों को क्या मतलब — ना! जो आदमी माँस खा रहा है, वह इस पूरे ग्रह का नाश कर रहा है। तो सबसे पहले तो यह तर्क खत्म होना चाहिए कि कौन क्या खा रहा है यह उसका व्यक्तिगत मसला है। नहीं! और इसे बड़े लिबरल तरीके से कहा जाता है कि, “मुझे इस बारे में क्यों परेशान होना चाहिए कि किसी की थाली में क्या है?” — आपको किसी की थाली…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org