माँस के डब्बे के पीछे की कहानी नहीं जानते?

सौ साल पहले आप माँस खाते थे तो आपको दिखाई पड़ता था जानवर का वध किया जा रहा है और जानवर खड़ा है गला कट रहा है।

अभी बहुत सुंदर डिब्बा आ जाता है पैकेज्ड मीट का और वो आप ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं, और वो बड़ा सुन्दर लगता है। पीछे की बर्बरता छुपा दी गई, पहले दिखती तो थी।

अब चाहे तुम जूते का डिब्बा मँगाओ या माँस का, वो एक से दिखते हैं।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org