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महिला सिर्फ़ देह नहीं! || आचार्य प्रशांत
रीना विलियम्स का था कुछ साल पहले की बात है वो खेल रही हैं तो खेल रही है तो टेनिस प्लेयर हैं तो पसीना आया पसीना आया तो ड्रेस में से उनका जो टॉप था वो दिखाई देने लग गया क्योंकि गीला हो गया तो दिखाई देने लग गया तो किसी ने उस पे कमेंट करा कि इतनी झीनी ड्रेस क्यों पहनी और हम तो टेनिस देखने आए थे ब्रेस्ट देखने थोड़ी आए थे तो कुछ इस तरह से जवाब आया कि यस आई एम अ वूमन एंड वीमेन हैव निप्पल्स यू हैव अ प्रॉब्लम विथ दैट मैं दुनिया की टॉप टेनिस प्लेयर हूं और तुम्हारी कुल इतनी हैसियत है कि टिकट लेकर ये मुझे खेलते देखने आए हो। ये तुम हो तो तुमको रिझाने के लिए तो मैं अपने ब्रेस्ट डिस्प्ले नहीं ही कर रही होंगी।
मैं खेल रही हूं। खेलने की प्रक्रिया में अगर मेरी ड्रेस थोड़ी पारदर्शी हो गई तो हो गई तो हो गई। इसमें कौन सी बड़ी शर्म की या बवाल की बात हो गई। ये वहां ही कहा जा सकता है। जहां पर समाज सचमुच टेनिस में उत्सुक हो। जहां लोग टेनिस प्लेयर को महिला टेनिस प्लेयर को भी इसलिए देखने जाते हो कि छोटी स्कर्ट पहन के टेनिस खेलेगी। टेनिस के बहाने इसकी जांग देखने को मिलेगी। वहां सब मामला गड़बड़ा जाता है। कोई क्या जिंदगी में आगे बढ़ेगा? कोई क्या वैज्ञानिक बनेगा, कलाकार बनेगा, खिलाड़ी बनेगा। अगर उसके दिमाग में हर समय अपनी देह ही घूम रही है।
