महिला घर और दफ्तर एक साथ कैसे संभाले?

देखिए— “एक महिला होकर घर और कार्यस्थल में समुचित तादात्म्य कैसे बैठाया जाए,” तो आप शायद अपनी पहचान के भीतर से ये सवाल कर रही हैं। आपने सवाल करते वक्त ही ये तय कर लिया है, ये शर्त रख दी है, कि महिला होने की जो पुरानी, परंपरागत, तयशुदा परिभाषा है, उसका तो मुझे सम्मान करना ही है।

समझिएगा, जब आप कहती हैं कि आप महिला हैं, तो आपका आशय लिंग से नहीं है; आपका आशय एक धारणा से है। अंतर समझ रही हैं? लिंग तो…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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