महापुरुषों जैसा होना है?

जिसको भी तुम मानते हो अपने से ऊँचा, जिसको भी सम्माननीय मानते हो, उसकी छवि लगातार आँखों में बसी रहें और आँखें ऐसी हैं नहीं कि जब तक वो भौतिक रूप से न देखें तब तक उनमें छवि बैठी रहे, तो भौतिक रूप से ही सही, एक तस्वीर लाकर टाँगो।

कोई ऐसा जिसके सामने झुकने की तबीयत किया करे। कोई भी ऐसा।

वो कोई काल्पनिक पात्र भी हो सकता है। वो किसी उपन्यास का भी कोई पात्र हो सकता है। कोई ऐसा होना चाहिए जिसका दर्शन…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org