मन सही लक्ष्य से भटक क्यों जाता है?

पूरी दुनिया के सभी लोग छुपे हुए दर्द में ही जी रहे हैं।

अगर उन्हें अपने दर्द का एक प्रतिशत भी ज्ञान हो जाए, तो फूटफूट कर रो पड़ेंगे।

ये सब जो हँसते हुए, मुस्कुराते हुए लोग तुम्हें चारों ओर दिख रहे हैं, ये सब मुस्कुरा सिर्फ़ इसलिए रहे हैं क्योंकि इन्हें अपनी छाती के दर्द का कुछ पता नहीं है। ये संवेदनाशून्य हो गए हैं। इनके अंगों की संवेदना चली गई है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org