मन को कुसंगति से दूर रखने का क्या तरीक़ा है?

मन को कुसंगति से दूर रखने का क्या तरीक़ा है?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मन को कुसंगति से दूर रखने का क्या तरीक़ा है?

आचार्य प्रशांत: एक तो ये है ही कि मन को सफ़ाई में रखोगे तो सफ़ाई में रहेगा और कीचड़ में रखोगे तो कीचड़ में रहेगा। आप मन को कीचड़ में न भी रखिए, आप कहिए कि मैं किसी से मिलती-जुलती नहीं हूँ, मैं तो अकेले रहती हूँ, तो मन वहाँ भी कीचड़ ढूँढ ही लेता है। क्योंकि बहुत सारी कीचड़ तो मन ने पहले से ही सोख रखी होती है अपने भीतर।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org