मन का बदलना ही है मन का पुनर्जन्म

प्रश्नकर्ता १: आचार्य जी, मन में एक प्रश्न बहुत उठता है। जैसे आज आपने कहा कि जिसमे आनंद मिले वही सत्य, तो जैसे मुझे पढ़ने में बड़ा आनंद मिलता है, सिर्फ पढ़ने में और मैं काम भी करता हूँ, जॉब भी करता हूँ। तो बहुत बार लगता है कि जो रोज हम काम करते हैं उसकी समय सीमाएँ, उसकी जो चीज़ें हैं, वो मेरे पढ़ने में बाधा बनती हैं। तो मुझे ये तो पता है कि हाँ, मेरा दिल कहाँ जा रहा है, पर फिर ये जो मन की कंडीशनिंग इस तरह हो रखी है कि अगर जीवन में कोई…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org