मंदिर- जहाँ का शब्द मौन में ले जाये

प्रश्न: ‘अनहता सबद बाजंत भेरी’, कृपया इसका अर्थ बताएँ?

वक्ता: मंदिर से जो घंटे, घड़ियाल, ढोल, नगाड़े की आवाज़ आ रही है; वो ‘अनहद’ शब्द है | घंटा जैसे बजता है, अच्छा है | शब्द वही अच्छा जो जब बजा तो ऐसे बजा जैसे चोट करी हो, और फिर क्योंकि चोट करी, इसीलिए तुम्हारा मन उसी के साथ जाकर अटक गया | मन तो स्थूल होता है | जो बातें बड़ी, आकर्षक, डरावनी या लुभावनी हों, मन उन्हीं के साथ जाकर अटकता है | तुम बैठे हो और अचानक घंटा बज जाए, मन जाकर उस पर अटक जाएगा | ज़ोर की चोट होती है |

मन उस पर अटका। वो जो झंकार थी, उस पर अटका और फिर वो झंकार स्थूल से सूक्ष्म होती…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org