भक्ति माने क्या?

दासातन हिरदै नहीं, नाम धरावे दास।
पानी के पीये बिना, कैसे मिटे पियास॥

~ संत कबीर

आचार्य प्रशांत: आदमी का मन किसी भी तरीके से अपनी बेहूदी चालाकियाँ छोड़ना नहीं चाहता। आप उसे एहसास कराओ कि तू अज्ञानी है तो वो कहेगा, ‘अच्छा, मैं ज्ञान हासिल कर लेता हूँ’ कौन ज्ञान हासिल कर लेगा? “मैं, मैं ज्ञान हासिल कर लेता हूँ।” ज्ञान मिल गया, और मैं, मैं का मैं ही रहा। पहले अज्ञानी-मैं था अब और अच्छा…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org