भक्ति का आधार क्या है?

जलि थलि महीअलि भरिपुरि

लीणा घटि घटि जोति तुम्हारी

~ नितनेम

जल में, थल में, आकाश में तुम सब सर्वस्व विद्यमान हो। जल, थल आकाश तुम ही विद्यमान हो। तुम्हारा प्रकाश हर हृदय में है।

वक्ता: सवाल यह है कि ‘तुम’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, ‘तुम्हीं विद्यमान हो,’ ‘तुम्हारी ज्योति है’; तो किसी बाहरी का नाम लिया जा रहा है तुम कह करके। अपने से अलग किसी की ओर…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org