ब्रह्म को कैसे जानें?

‘ब्रह्म को देखने’ से आशय है कि — तुम्हारी आँखें अब व्यर्थ चीज़ों को इतना कम मूल्य देती हैं कि वो व्यर्थ चीज़ें दिखाई ही नहीं देतीं।

तुम्हारी आँखें अब व्यर्थ चीज़ों को इतना कम मूल्य देती हैं कि वो व्यर्थ चीज़ें दिखाई देकर भी दिखाई नहीं देतीं। ये है ब्रह्म को देखना।

अस्पताल में तुम्हारा कोई मित्र अभी-अभी भर्ती किया गया हो क्योंकि दुर्घटना हो गयी है और हालत गंभीर है। अभी-अभी खबर आयी है कि दुर्घटना हुई है…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org