बाहरी प्रेरणा साथ नहीं देती

आचार्य प्रशांत: रवि का सवाल है कि आज तक तो मैंने ज़िन्दगी में यही देखा है कि मेरी सारी प्रेरणा (मोटीवेशन) बाहर से ही आई है। कोई बाहरी व्यक्ति आता है, मुझे कुछ बोलता है और उससे मैं उत्साह से भर जाता हूँ। और मैंने यही देखा है कि ऐसा ही होता है। और रवि का कहना है कि ऐसा हो कैसे सकता है कि बाहरी प्रभाव के बिना ऊर्जा का स्त्रोत मेरे भीतर ही हो।

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org