बहन-बेटी की शादी कराने की इतनी आतुरता?

कोई नहीं कहता कि बहन को पढ़ाना है, लिखाना है, “आचार्य जी, भाई हूँ, धर्म निभाना है, बहन को स्वावलंबी बनाना है। बहन अपने पैरों पर खड़ी हो, आज़ाद हो जाए!” कोई आता ही नहीं! क्या समस्या है? “बहन की शादी!”

बहन से पूछ तो लो शादी वगैराह! ये उसका नीजी मसला है, प्राइवेट! पर्सनल मसला है ये। या तुम ज़बरदस्ती उसको कहोगे कि ले इसके साथ बाँध रहा हूँ, कमरे में घुस जा, सुहागरात मना।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org