बल का एक ही तर्क होता है: धर्म

और दुर्बलता के पास हज़ारों तर्क होते हैं।

बल के पास बहुत तर्क होते ही नहीं,

उसको एक ही तर्क पता है -

जो धर्मोचित है वो होना चाहिए।

दुर्बलता अपने आप को

बचाने और छुपाने के लिए

हज़ारों तर्क गढ़ लेती है।

~ आचार्य प्रशांत

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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