बच्चों की असफलता और बेरोज़गारी से घर में तनाव

जिसको हम सामान्य भाषा बोलते हैं, वो बड़ी ज़हरीली है। जिस चीज़ को हम कहते हैं ‘अच्छी ज़िंदगी’, जिसको हम कहते हैं ‘आगे बढ़ना’, जिसको हम कहते हैं ‘लाइफ में सेटल हो जाना’ — वो सब बड़ी ज़हरीली धारणाएँ हैं। लेकिन ये हमारी ज़बान पर चढ़े हुए हैं तो हम इनका खटाखट इस्तेमाल करते रहते हैं। किसी के घर गाड़ी आ जाए, आप तत्काल उसको बधाई देंगे, “अच्छा जी! बढिया है। खुशी की बात है।” ये ख़ुशियों की बातें, ये सब शुभ समाचार और…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org