बच्चे का भला चाहते हों तो उसे आध्यात्मिक परवरिश दें

जिस घर में संतों की बात नहीं होगी, जिस घर में भजन नहीं होगा, उस घर में शांति मुश्किल है।

ग्यारह साल, चौदह साल का होते-होते मन का बहक जाना तय है, वो तो होना ही होना है। उसको काटने के लिए, उस होनी को टालने के लिए सतनाम होता है। वो सतनाम अगर नहीं लिया गया घर में तो बच्चा तो उस तरफ को जाएगा ही ना जिस तरफ को उसकी वृत्तियाँ प्रेरित करती हैं।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org