बच्चा कौन? बूढ़ा कौन? ब्रह्मचर्य क्या?

प्रश्न: आचार्य जी, नचिकेता बिलकुल निडर होकर ब्रह्म के पास चले जाते हैं और कबीर जी के ‘आई गँवनवा की सारी’ के भजन का पात्र रो-रोकर जाता है। तो क्या ऐसा होता है कि बाल्यपन में आसान होता है, और समय बीतने पर स्वयं जाना मुश्किल है, या फ़िर घसीटना पड़ता है?

आचार्य प्रशांत: देवेश (प्रश्नकर्ता) कह रहे हैं कि, “नचिकेता एकदम निडर होकर यम के पास चला जाता है और कबीर के ‘गँवनवा की सारी’ भजन का पात्र रो-रोकर…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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