बंधन भी, मुक्ति भी - जो तुम चाहो!

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने प्रकृति का संबंध बताया जहाँ पर एक संबंध पत्नी का संबंध है और एक संबंध माँ का संबंध है, तो मुझे रामकृष्ण परमहंस याद आ रहे हैं। तो वहाँ पर जो संबंध था, जो वे देवी की तरह, माँ की तरह पूजते थे तो यह वही संबंध है?

आचार्य प्रशांत: वही बात है, बिल्कुल वही बात है। माँ से आपको पोषण मिलता है, समझिएगा, पर माँ को आप भोगते नहीं हो। माँ से जीवन मिलता है, माँ से सब कुछ मिलता है। जन्म भी देती हैं माँ, पोषण भी देती हैं, उसके बाद परवरिश, संस्कार, लालन-पालन, सब मिलता है, लेकिन भोगते नहीं न माँ को। माँ से बच्चे की तरह लेते हो, पत्नी से संबंध दूसरा होता है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org