बँटा मन तो बँटा जीवन

प्रश्नकर्ता: आदमी बँटा हुआ कैसे है?

आचार्य प्रशांत: जितनी भी चीज़ें अलग-अलग दिखाई देती हैं, उनके बंटने का कारण आदमी का दिमाग ही है। फिर उसमें जात, धर्म, देश, हज़ार तरीके के बंटवारे चारों तरफ आ जाते हैं। दुनिया इसीलिए बंटी हुई है क्योंकि आदमी का मन एक नहीं है। उस पर हज़ार चीज़ों ने कब्ज़ा कर रखा है छोटा, छोटा। तो उसको उनको अलग-अलग रखना है क्योंकि वो जो चीज़ें हैं, जो कब्ज़ा करके बैठी हैं, वो अलग हैं; वो एक हो नहीं सकती हैं। तो फिर…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org