प्रेम सीखना पड़ता है

प्रश्नकर्ता: जब भी आपसे कोई प्रश्न पूछना चाहता हूँ, बेईमानी एकदम मुँह फाड़े खाने को खड़ी रहती है और मैं अपनी बची हुई सेल्फ-इमेज (आत्म छवि) को लेकर भागता हूँ इस डर से कि उसे भी खो न दूँ। इस दलदल से निकलने का समाधान प्रेम प्रतीत होता है पर वो तो जीवन से नदारद है। कैसे खोजूँ?

आचार्य प्रशांत: चौदहवाँ अध्याय था, तुमने पढ़ा कि नहीं पढ़ा, हैं भई? या बस अपनी परेशानियाँ बताओगे? सब परेशानियों का जो इलाज है उसको पता नहीं तुमने पढ़ा कि…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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