प्रेम सीखना पड़ता है

प्रश्नकर्ता: जब भी आपसे कोई प्रश्न पूछना चाहता हूँ, बेईमानी एकदम मुँह फाड़े खाने को खड़ी रहती है और मैं अपनी बची हुई सेल्फ-इमेज (आत्म छवि) को लेकर भागता हूँ इस डर से कि उसे भी खो न दूँ। इस दलदल से निकलने का समाधान प्रेम प्रतीत होता है पर वो तो जीवन से नदारद है। कैसे खोजूँ?

आचार्य प्रशांत: चौदहवाँ अध्याय था, तुमने पढ़ा कि नहीं पढ़ा, हैं भई? या बस अपनी परेशानियाँ बताओगे? सब परेशानियों का जो इलाज है उसको पता नहीं तुमने पढ़ा कि…

--

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

More from Medium

Perhaps We Can Find Peace in Every Step

Small Children Teach Us

This affirmation holds you like only you can hold yourself. And some uncomfortable mirror stuff.

image of an adult’s shoulder in a wide knit, light grey sweater, with some wisps of brown hair visible and a baby’s hand gripping the upper arm. The feeling is embrace or being held.

3 Tips to Take Your Astrology Skills to the Next Level