प्रेम में तोहफ़े नहीं दिए जाते, स्वयं को दिया जाता है

प्रश्नकर्ता (प्र): सर, आपने कहा था कि तुम्हें कैसे पता कि खीर पसंद है कि मक्खन। तो अगर हम प्रेम से भोग लगा रहे हैं, तो क्या वो भी वैसी ही बात हुई?

आचार्य प्रशांत (आचार्य): प्रेम प्रमुख है न। न पत्र, न पुष्प, न फल। प्रमुख क्या है? प्रेम। अब प्रेम से देने के लिए, देखिये, कोई बहुत बड़ी चीज़ें तो नहीं कही गई हैं। पत्र माने पत्ता, पुष्प माने फूल, न सोना न चांदी। फूल, पत्ता। प्यार…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org