प्रेमियों का प्रेम अक्सर हिंसामात्र

दुनिया अब और ऐसी होती जा रही है जिसमें भोगने पर ज़ोर है। जिंदगी से और ज़्यादा वसूल लेने पर ज़ोर है। ‘जितना ज़्यादा ज़िन्दगी से नोच खसोट सकते हो नोच खसोट लो।’ तुम्हें लगातार यही शिक्षा दी जा रही है। ‘भोग लो, चूस लो, एक बूँद भी छूट ना जाए।’

और वो हो नहीं पाता क्योंकि जितना तुम्हें चाहिए उतना तुम्हारी क्षमता के बाहर का है और जितना तुम्हें चाहिए उतना औरों को भी चाहिए। जितना तुम्हें चाहिए वो असीमित है, इसलिए…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org