प्राण क्या हैं?

उपनिषद् कहते हैं, “प्राण ही ब्रह्म है।” मिट्टी का आपका शरीर है, उसमें जितनी प्रक्रियाएँ होती हैं, वो सब यांत्रिक हैं। पर कुछ ऐसा भी घटित होने लगता है इस शरीर में जो यांत्रिक नहीं है। जो कुछ भी यांत्रिक है, उसका कारण होता है। कुछ ऐसा भी घटित होने लग जाता है इस शरीर में जो यांत्रिक नहीं है।

आप आनंद अनुभव कर सकते हैं, आप बोध में उतर सकते हैं। आप प्रेम में डूब सकते हैं। ये बड़ी विलक्षण घटना घटी। मिट्टी को प्रेम का अनुभव होने लग गया।

--

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

More from Medium

The Wisdom of Jung

Feelings of dislike for others.

Alice Gatsby’s Wonderland

The Magic of Triplicity Rulers in Astrology

Banner of the blogpost title — The Magic of Triplicity Rulers in Astrology — on a pink background, with various elemental and astrological and constellational glyphs and swirls.