प्रशंसा — स्वास्थ्य का भ्रम

स्वास्थ्य स्वभाव है और स्वस्थ होने का मतलब होता है, सब ठीक है।

प्रशंसा स्वास्थ्य का भ्रम देती है।

देखियेगा आप कि जब भी किसी ने आप की तारीफ़ की है, उसने आपसे यही कहा है कि तुम ठीक हो। तुम ठीक से ठीक हो। कोई कमी नहीं है तुममें। दूसरों में कमी होगी तुममें कोई कमी नहीं। इसी कारण तुम श्रेष्ठ हो।

प्रशंसा आपको भुलावा देती है कि आप स्वस्थ हैं और यदि आप स्वस्थ हैं तो आपको

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org