प्रकृति रिझाए मुक्ति बुलाए, बुरे फँसे हम

हम असुरक्षित हैं तभी तो रोज़-रोज़ सुरक्षा की तरफ भागते है। न सिर्फ़ हम असुरक्षित हैं बल्कि हमें सुरक्षा से प्यार है। उसी सुरक्षा को अध्यात्म ने नाम दिया है सत्य का, अंत का, मुक्ति का। वो जो इकलौती चीज़ जो प्रेम के, प्यार के योग्य है वही अध्यात्म का लक्ष्य है। असुरक्षित आदमी के लिए उस परम ध्येय का नाम है ‘सुरक्षा’। भयाक्रांत आदमी के लिए उस परम ध्येय का नाम है ‘निर्भयता’। बद्ध आदमी के लिए उस आखिरी मंज़िल का नाम है ‘मुक्ति’।…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org