प्यार माँगा नहीं जाता, प्यार के काबिल हुआ जाता है

प्यार माँगा नहीं जाता, प्यार के काबिल हुआ जाता है

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं ‘स्नेह’ या यूँकहूँ तो ‘अटेंशन’ की प्राप्ति के लिए कभी-कभी अपने आप को कमज़ोर दिखाती हूँ। मैं ऐसा क्यों करती हूँ?

आचार्य जी: हम सब पूर्णता में जीना चाहते हैं। हम सब स्वास्थ्य में जीना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हमारे अनुभव में न आए कि हम बीमार हैं, आधे-अधूरे हैं, चिंताग्रस्त हैं, पर ऐसा हो नहीं पाता। हमारा अनुभव ही हमें बता देता है कि हमारी हालत…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org