पैसे और रोज़गार को लेकर कुछ सवाल

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम! जी मेरा नाम सूरज है और मैं उत्तरांचल का रहने वाला हूँ। अभी मैं चार-पाँच साल से एक जॉब कर रहा हूँ। जो ब्लूटोकाई नाम की कंपनी है उसमें कॉफ़ी का काम होता है। उसमें सर्विंग का काम, होटल उद्योग ये सभी है। तो इसकेे साथ-साथ मैंने लॉकडाउन में कुछ काम शुरु किया है, मोमोज बनाने का और इसके साथ और भी प्रकार है। जैसे कि सोया चाप हो गई, ये सब चीज़ें भी हो गई। पर इसमें बहुत ज़्यादा आय नहीं हो पा रही है। तो लॉकडाउन में मैंने ये शुरू इसलिए किया था क्योंकि जॉब में उन्होंने मेरे को ब्रेक दे दिया था। उन्होंने कहा था कि अभी परिस्थिति अच्छी नहीं है तो काफ़ी लोगों को उन्होंने निकाल दिया था। तो अब फ़िर उन्होंने दोबारा बुला दिया तो मैं दोबारा जुड़ गया हूँ। पहले मैं सिनेमा में जॉब करता था, फ़िर पिज्जा हट में किया, फ़िर मैंने स्टारबक्स में किया, फ़िर इसके बाद ब्लूटोकाई में किया इस तरीके जॉब चलता ही जा रहा है। मगर अभी कुछ साफ़ नहीं हो पाया कि क्या करूँ, क्या ना करूँ? बेचैनी सी रहती है, क्या काम करूँ, क्या ना करूँ?

आचार्य प्रशांत: खर्चें कैसे हैं?

प्र: खर्चे तो सर सामान्य ही हैं। मतलब वहाँ पर जाना है…

आचार्य: तुम्हारे अपने खर्चें कैसे हैं?

प्र: अपने खर्चे मैं सर क्या बताऊँ। मतलब मेरे पास तो वैसे कुछ है नहीं ख़र्चा तो।

आचार्य: शादी-शुदा हो?

प्र: जी नहीं।

आचार्य: और कोई क़र्ज़ वगैराह ऐसा कुछ?

प्र: नहीं-नहीं कुछ भी नहीं है सर।

आचार्य: तो फिर क्या डर है? अपना काम कर रहे हो करो।

प्र: सर वही बात बता रहा हूँ। सब तो काम कर रहा हूँ कोई दिक्कत नहीं है। काम में कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। बेचैनी सी लगती है। जब से आपको सुन रहा हूँ और ज़्यादा बेचैनी लगती है।

आचार्य: ऊँचे-से-ऊँचा आख़िरी उच्चतम आदर्श काम एक झटके में नहीं मिल जाएगा। जीवन चलते रहने का नाम है। जिस नौकरी में हो उस से बेहतर अगर तुमको स्वरोजगार लग रहा है तो करो न। फ़िर उससे आगे निकल जाना। कम-से-कम अपना काम कैसे करा जाता है यह सीखने की शुरुआत तो करो। अभी अगर तुम्हारे ऊपर कोई ज़िम्मेदारी या कर्जे वगैराह नहीं है तो यह सबसे अच्छा मौका है न। अधिक-से-अधिक क्या होगा? कुछ गलतियाँ करोगे, तुम्हारा अपना धंधा है वो चलेगा नहीं।

प्र: नहीं, काम शुरू कर रखा है। मगर वो दुकान लेकर नहीं कर रखा है, रोड़ पर ही है।

आचार्य: जहाँ भी कर रहे हो, जैसे भी कर रहे हो उसमें अधिक-से-अधिक क्या बुरा हो जाएगा?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org