पिता के पैसों पर निर्भरता

ये जो पीढ़ी अभी खड़ी हुई है,

इन्हें सब कुछ इतनी आसानी से मिला है

कि इन्हें काम करने की ज़रूरत क्या है?

और ये वो पीढ़ी है जिसने

कष्ट बहुत कम देखे हैं।

जो कष्ट कम देखेगा,

उसके भीतर लोहा नहीं बनेगा फिर।

सब कुछ बहुत आसान कर दिया गया है।

नतीजा,

एक लिचलिची कमज़ोर पीढ़ी,

जो मुँह तो बहुत चलाती है

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org