पहले पागल थे, या अब हो गए?

संपूर्ण आध्यात्मिकता का अगर कोई एक ध्येय है, तो वो यह है कि आप इस ज़िन्दगी को भली-भांति भरपूर जिए; इस बात को दस बार दोहराइएं — सम्पूर्ण आध्यात्मिकता का अगर कुछ ध्येय है तो वह यह है कि आप, यह जो आपका जीवन है जिसको आप अपना आम जीवन बोलते है कि मै एक जीवी हूं, मनुष्य हूं, देह में जी रहा हूं, यह मेरा घर है, यह संसार है, यह समाज है, यह रुपया-पैसा है, कपड़े है इत्यादि — तो इस जीवन को आप भली-भांति, पूरे तरीके से आनंदित हो कर जी पाए; यह है सारी…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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