परिवार और ज़िम्मेदारियाँ आड़े आते हों तो

परिवार और ज़िम्मेदारियाँ आड़े आते हों तो

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि परिवार और कर्तव्यों के कारण मैं सत्य की तरफ़ एक मन से नहीं बढ़ पा रही। कृपया इस बात का झूठ देखने में मेरी मदद करिए।

आचार्य प्रशांत: ये लड़का (सामने बैठा श्रोता) एक सौ बीस किलो का है, यही उत्तर है मेरा। इस सूत्र से जो समझना है समझ जाओ।

अगर ये आश्रम आएगा तो क्या लेकर के आएगा? पूरे एक सौ बीस किलो। जिसके ऊपर जो बोझ लग…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org