पता भी है कौन बचा रहा है तुम्हें?

अनदिनु साहिबु सेवीऐ अंति छडाए सोइ ॥

नितनेम (शबद हज़ारे)

आचार्य प्रशांत: “अनदिनु साहिबु सेवीऐ अंति छडाए सोइ”

दो बातें यहाँ पर, साफ़-साफ़ समझो। ‘अंत’ से यहाँ पर आशय, समय में अंत नहीं है। हम ‘अंत’ का मतलब समझते हैं — समय में आगे का कोई बिंदु। अंत से अर्थ है — ऊँचाई। अंत से अर्थ है — आख़िरी। अंत से अर्थ है — बड़े से बड़ा।

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org