न कृष्ण से न राम से, हम सीखते हैं घर — मीडिया — दुकान से

प्रश्नकर्ता: मैं बहुत, बचपन से ही बहुत डरा हुआ और दुखी था। फिर मैंने उसका उपाय के लिए, जब समझा तब, उपाय के लिए मैंने गीता पढ़ी, रामायण पढ़ा, अष्टावक्र-गीता पढ़ी, कबीर के भजन सुने, ओशो को भी बहुत सुना, आपके भी वीडियो(चलचित्र) बहुत सुने, उसके बाद विपश्यना की, ध्यान-विधियाँ भी कीं, लेकिन आज भी मैं वही डरापन और वही दुख पाता हूँ। तो, और मुझे तब जब सुनता हूँ, तब लगता भी है कि मैं समझ रहा हूँ लेकिन…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org