न अच्छा न बुरा है संसार, समझ गए तो रास्ता, न समझे तो दीवार

आत्मज्ञान के अभाव में हमें नहीं पता कि हमें क्या चाहिए तो फिर हम गलत चीज़ों का सेवन करते रहते हैं।

जब तुम केन्द्रीय चीज़ को भूलकर के किसी बाहरी चीज़ को तवज्जो दे रहे हो तो फिर जीवन में भी तुम्हें कोई केन्द्रीय फल, आनंद नहीं मिलेगा।

सब दोष हैं, सब विकार हैं और नहीं उनको इतनी आसानी से त्यागा जा सकता। हम कहा कह रहें हैं कि तुम तुरंत ही…

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store