🔥निर्भयता, न कि अभयता🔥

आचार्य जी: भय और अभय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ये दोनों हमेशा साथ-साथ चलते हैं।

मैं अभी तुमसे बोल रहा हूँ ,जब भय ही नहीं है तो अभय का सवाल ही पैदा नहीं होता।

बिल्कुल डरे न होने के लिये, डर के पार जाने के लिये यह दूसरा शब्द है, वो है निर्भयता। और निर्भयता और अभयता में ज़मीन-आसमान का अंतर है। तुम अभयता की तलाश में हो, तुम निर्भय नहीं हो। निर्भय होने का अर्थ है, भय का विचार ही नहीं।

तो जो द्वैत है, भय का और अभय का, हम उसके पार हो गये। हम वहाँ स्थित हैं, जहाँ भय हमें छूता ही नहीं है।

अभयता मत मांगो, सहजता मांगो।

~ आचार्य प्रशांत जी🍁

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वीडियो लिंक: https://youtu.be/I9MJq-fuVlk

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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