नशा करके भी तो खुशी मिलती है

दो बातें होती हैं आध्यात्मिक मुक्ति में, जो नशे में नहीं होती हैं। पहली पूर्णता और दूसरी नित्यता।

तुम कितनी भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर लो या कितना भी बड़ा नशा कर लो, वो पूरा नहीं हो सकता, उसमें कुछ न कुछ खोट बचा रह जाता है।

नशा कितना भी गहरा जाए, जो नशे में है, उसमें जरा सा होश बचा रहता है। तुम पर पूरा नशा छा गया तो फिर नशे का मजा कौन लेगा? कैसा भी नशा चढ़ा हो, उतरेगा। सूरज कितना भी ऊँचा उगा…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org