नया जीवन धीरे धीरे आता है, या एक छलाँग में?

प्रश्नकर्ता: सर, पढ़ा है मैंने कहीं की एक होता है, “टेक अ प्लंज” और दूसरा होता है की अपने जड़ मजबूत करो। ये समझ में नहीं आता है।

आचार्य प्रशांत: बेटा दोनों घटनाएँ एक साथ घटती हैं। मज़बूत जड़ से पौधा न निकले ये होगा नहीं ना। जड़ में जितनी मज़बूती है उस हिसाब से उसमें से अंकुरण होगा, पौधा थोड़ा बाहर आएगा। जब आ रहा हो तो मैं कहता हूँ, “उस को आने दो।” जितना जान लिया है वह अभिव्यक्त होना चाहता है…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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