नए साल के दस संकल्प

आचार्य प्रशांत: १. एक डायरी बनाओ, उसमें नियम से रोज़ रात को लिखा करो कि दिन के कितने मिनट मुक्ति के लिए बिताये। बिल्कुल साफ़ हिसाब। और उसमें लिखा करो कि कितने काम थे कि जो तुम्हें नहीं करने चाहिए थे पर प्रकृति करवा गई, ईमानदारी से। इन सारे कामों का विवरण लिखा करो। सबसे पहले लिखो कि मुक्ति के लिए कितना समय दिया। फिर लिखो कि कितने काम थे जो नहीं होने चाहिए थे पर देह करवा गयी, प्रकृति करवा गयी, मस्तिष्क करवा गया, होर्मोन्स करवा गए। ये हिसाब हर हफ्ते किसी ऐसे को दिखाओ जिसको दिखाने में खतरा हो। ये जो लिखा है इसको हफ्ते-दर-हफ्ते, नियमबद्ध किसी ऐसे को दिखाओ जिसको दिखाने में खतरा हो।

२. अपने मासिक खर्चे में से बताओ कि अपनी मुक्ति पर कितना खर्च कर रहे हो। महीने भर में जितना भी खर्च करा, उसमें से पेट पर कितना करा, खाल पर कितना करा, गर्व पर कितना करा, मोह पर कितना करा, कामवासना पर कितना करा। और ये सब करने के बाद मुक्ति के लिए कुछ बचा, खर्च करने के लिए।

३. समय को देख लिया, धन को देख लिया अब अपनी उपस्थिति को देखो। महीने भर में तुम्हारी जहाँ कहीं भी मौजूदगी रही, तुम्हारी मौजूदगी का कितना प्रतिशत मुक्ति के लिए रहा। तुम यहाँ भी पाए जाते हो, तुम वहाँ भी पाए जाते हो। तुम क्या किसी जगह पर अपनी मुक्ति के लिए भी पाए गए? इसमें फिर यात्रा आ जाती है। क्या तुमने अपनी मुक्ति के लिए यात्रा करी? क्योंकि यात्रा तो करते ही हो, घर से दफ़्तर तक की, दफ़्तर से बाज़ार तक की और बाज़ार से घर तक की, रिश्तेदारों के यहाँ तक की। ये भी यात्रायें ही तो हैं। तो यात्राओं में मुक्ति के लिये कौन सी यात्रा करी?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org