ध्यान क्या है? ध्यान की विधियाँ क्या हैं?

श्रोता: यह सब कुछ जो, बताया जा रहा है, जो चल रहा है, चाहे ध्यान की विधियाँ, चाहे कुछ भी, जितना भी हमने, अब तक करा। उसकी अनुभूति हमें कैसे हो? यह क्यों कराया जा रहा है। कौन सी स्थिति, हमे बताई जा रही है; हमें पहुँचाया कहाँ जा रहा है? और पहुँचना कहाँ है? वो हमें समझ नहीं आ रहा।

आचार्य जी: तुम्हें खाना खिलाया जा रहा है, उसके बाद क्या बोलोगे के अब बताओ के खाना खिलाया क्यूँ? खाना भी खाओगे, और उसके बाद, उत्तर भी माँगोगे। भूख मिट गयी – क्या यही उत्तर पर्याप्त नहीं है? विचित्र ही होगा कोई आदमी, जो खाना खाने के बाद, यह पूछे, यह क्या चीज़ है? और यह मुँह से भीतर क्यों…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org